जुमा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ने के फ़ज़ाइल, हदीस और बरकतें
सम्पूर्ण अरबी टेक्स्ट, हिंदी अनुवाद और ऑडियो
1. दो जुमों के बीच नूर की चमक
जुमा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ना मोमिन के दिल और रास्ते को रूहानी नूर से रौशन करता है।
2. दज्जाल के फितनों से हिफ़ाज़त
सूरह कहफ़ की पहली 10 आयतों को याद करना और पढ़ना दज्जाल के फितने से बचाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जुमा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ना क्यों ज़रूरी है?
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: 'जो शख़्स जुमा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ता है, उसके लिए दो जुमों के बीच एक नूर चमकता रहता है' (बैहक़ी)।
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